काव्यांचल

मुखपृष्ठ

मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य” -नीरज जी की इस पंक्ति के आलोक में हम विश्व के प्रत्येक सौभाग्यशाली मानव को प्रणाम करते हैं। ज़िंदगी के कुछ बेहद ख़ूबसूरत लम्हात वक़्त के किसी लासानी ज़र्रे में किसी सुख़नवर के ज़ेह्न के रास्ते जब काग़ज़ पर उतरते हैं तो दुनिया की सारी दौलत से कहीं क़ीमती हो जाता है वो एक सफ़हा। लेकिन जब किसी दिल से कोई दर्द भरी ‘आह’ या ख़ुशदिल ‘वाह’ निकलती है तो ऐसे हज़ारों सफ़हे निछावर हुए जाते हैं।

काव्यांचल एक क़ोशिश भर है… क़द्रदानों और सुख़नवरों के बीच मौज़ूद इस मरासिम को मंज़र-ए-आम तक लाने की। यहाँ सुख़नवर अपने क़द्रदानों से भी उतना ही क़रीब हो सकता है जितना कि वो अपने अहसासात से होता है।

आप सुख़नवर हों तो अपने क़लाम के ज़रिए और क़द्रदान हैं तो आह-वाह के ज़रिए इस क़ुनबे में शामिल हों…

आपका स्वागत है!

3 Responses to “मुखपृष्ठ”

  1. 1
    Ram Chandra Verma "Sahil" Says:

    i would like to join the group. please advice.

  2. 2
    arun bajaj Says:

    i want to join this group because i am interested in literature.

  3. 3
    sheshnath Says:

    I want to join kaavyanchal group.

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