आनी-जानी दुनिया है
ये कब किसकी दुनिया है

दुनिया में सब लोगों की
अपनी–अपनी दुनिया है

सबसे अच्छा अपना घर
यूँ तो सारी दुनिया है

उसको ये अहसास कहाँ
उससे मेरी दुनिया है

अब उस पर क्या हक़ मेरा
उसकी अपनी दुनिया है

© दिनेश रघुवंशी