मुझे डर है कहीं तन्हाई से अपनी न डर जाये
मुझे डर है कहीं वो टूटकर के ना बिखर जाये
ख़ुदा मेरी दुआओं में असर इतना तो रख लेना
अगर वो डूबना चाहे तो दरिया ही उतर जाये

© दिनेश रघुवंशी