नाम : अजय सहगल
जन्म : डलहौजी, हिमाचल प्रदेश

प्रकाशन
सवाल राष्ट्र का
सुगन्धि

निवास : जम्मू और कश्मीर


अजय सहगल उन गिने-चुने रचनाकारों में से एक हैं जिन्होंने देशप्रेम की कविताएँ लिखी ही नहीं बल्कि उन्हें जिया भी है। देश की सेवा में रत रक्षा प्रहरियों की सुविधाओं के लिए दिन-रात तत्पर रहने वाले अजय जी का काव्यकर्म उन अनछुए प्रश्नों को समर्पित है जिन पर यकायक सबका ध्यान नहीं जाता। बी ई (सिविल) तक शिक्षाध्ययन करने के बाद से अजय जी ‘रक्षा संपदा संगठन’ में सेवारत हैं। हिमाचल की धरती से उपजे इस रचनाकार की रचनाएँ ऐसी वैचारिक संपदा है, जो समाज के नवनिर्माण में सहयोगी हो सकती है। अजय जी का कथ्य उनके शिल्प की सीमाओं में बंधने को तैयार नहीं है। वे सत्य को आलंकरिक करने से अधिक उसे बलिष्ठ करने में विश्वास रखते हैं। सकारात्मकता और जिजीविषा उनके काव्य के दो आयाम हैं। ‘सवाल राष्ट्र का’ और ‘सुगन्धि’ उनकी दो प्रकाशित पुस्तकें हैं।
इस समय अजय जी श्रीनगर, कश्मीर में सेवारत हैं।