अक्कड़-बक्कड़ हो-हो-हो

पास न धेला
फिर भी मेला
देखें फक्कड़ हो-हो-हो

भूखा दूल्हा
सूखा चूल्हा
गीला लक्कड़ हो-हो-हो

मुँह तो खोलो
कुछ तो बोलो
बोला मक्कड़ हो-हो-हो

मांगा आलू
लाए भालू
बड़े भुलक्कड़ हो-हो-हो

छोड़ो खीरा
देके चीरा
खाओ कक्कड़ हो-हो-हो

© अजय जनमेजय