बिल्ली तुम कैसी मौसी हो
समझ न मेरे आया
चूहा कैसे खा जाती हो
सोच-सोच चकराया

अगर तुम्हें मौसी रहना है
सीखो ढंग से रहना
छोड़ म्याऊँ-म्याऊँ अब
तुम ‘मे आई कम इन’ कहना

© अजय जनमेजय