दिलक़श कमसिन बातें छोड़ो आज तल्ख़ियों पर चर्चा हो
फिर करना रिमझिम की बातें आज बिजलियों पर चर्चा हो

तितली, भौंरे, प्यार, वफ़ा, ठंडी फुहार, जज़्बाती मसले
ये मस्ती का वक़्त नहीं है राख-बस्तियों पर चर्चा हो

घूंघट-चूनर-शाल-दुपट्टा, लाज-शर्म था उसका गहना
फ़ैशन शो में नाच रहीं उन आम लड़कियों पर चर्चा हो

फ़ुर्सत से देखेंगे इनको, सारहीन ख़बरों को छोड़ो
आज तो केवल अख़बारों की ख़ास सुर्खियों पर चर्चा हो

बेमानी हैं सम्मानों के लेन-देन पर बासी बहसें
आज नवोदित कवि की ताज़ा रक्त-पंक्तियों पर चर्चा हो

© नरेश शांडिल्य