27 फ़रवरी 2011 को शाम 5:00 बजे
संत परमानंद अस्पताल सभागार (निकट सिविल लाइन्स मेट्रो स्टेशन, नई दिल्ली)
आप सादर आमंत्रित हैं
27 फ़रवरी 2011 को शाम 5:00 बजे
संत परमानंद अस्पताल सभागार (निकट सिविल लाइन्स मेट्रो स्टेशन, नई दिल्ली)
आप सादर आमंत्रित हैं
हिन्दी के जाने-माने कवि आलोक श्रीवास्तव को उनके ग़ज़ल-संग्रह ‘आमीन’ के लिए रूस का अंतरराष्ट्रीय पुश्किन सम्मान 2008 दिए जाने की घोषणा की गई है।
रूस के भारत-मित्र समाज द्वारा प्रतिवर्ष हिन्दी के एक प्रसिद्ध कवि या लेखक को मास्को में हिन्दी-साहित्य का यह महत्त्वपूर्ण सम्मान दिया जाता है। पिछले तीन वर्षों से इस पुरस्कार का ऐलान नहीं किया गया था।
आलोक श्रीवास्तव को यह सम्मान जल्द ही मास्को में आयोजित कार्यक्रम में दिया जाएगा। ‘आमीन’ के लिए आलोक को मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का दुष्यंत कुमार पुरस्कार, हेमंत स्मृति कविता सम्मान और परंपरा ऋतुराज सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित साहित्यिक-सम्मान मिल चुके हैं लेकिन वे हिंदी के पहले ऐसे युवा ग़ज़लकार हैं जिन्हें रूस का यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त होगा।
भारत मित्र समाज आलोक की प्रतिनिधि रचनाओं का रूसी अनुवाद प्रकाशित करेगा। आलोक से पहले यह सम्मान कवि उदयप्रकाश, लीलाधर मंडलोई, पवन करण, बुद्धिनाथ मिश्र, कहानीकार हरि भटनागर और महेश दर्पण आदि को दिया जा चुका है।
भारत को ललकार रहा है, फिर ड्रैगन शैतान।
जगे नहीं तो खो जायेगी, भारत की पहचान।।
आईपैक्स भवन के सभागार में कवि गजेन्द्र सोलंकी की इस हुंकार पर देर तक तालियाँ गूंजती रहीं। अवसर था नववर्ष 2011 के जनवरी माह के प्रथम रविवार को आयोजित मासिक कवि गोष्ठी का। इन्द्रप्रस्थ एक्सटेंशन दिल्ली-92 की सर्वाधिक चर्चित संस्था, ‘आईपैक्स भवन वेलफेयर सोसाइटी’ ने वीर रस की इस काव्य गोष्ठी में कवि गजेन्द्र सोलंकी, नव हस्ताक्षर विनय विनम्र तथा मंच संचालक राजेश जैन ‘चेतन’ को आमंत्रित किया था। यह गोष्ठी सोसाइटी के साहित्य विभाग द्वारा आरम्भ की गई नई योजना का प्रथम चरण था।
इस योजना के अनुसार वर्ष 2011 के प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को काव्य गोष्ठियों में किसी एक रस के प्रमुख कवि के साथ एक नवोदित कवि के सस्वर पाठ द्वारा स्थानीय निवासियों व श्रोताओं में साहित्यिक अभिरुचि की अभिवृध्दि करा कर इस कम्प्यूटर / मोबाइल युग में कुछ ज़िन्दादिली बनाई रखी जाने की चेष्टा को साकार करना है।
कवियों ने कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप-प्रज्ज्वलित करके किया। वीणापाणि की उपासना कर एक मधुर गीत श्री विनय विनम्र ने सुनाया और उसके साथ ही आरम्भ हो गया राजेश चेतन के संचालन में कवि गोष्ठी का मुख्य कार्यक्रम। इसके पूर्व सोसाइटी के प्रधान सुरेश बिन्दल ने आगन्तुकों का स्वागत-सत्कार भारतीय परम्परा के अनुसार किया और महासचिव आर सी जैन ने कविश्रेष्ठ डॉ. बृजेन्द्र अवस्थी का परिचय व उनकी काव्यधारा का वर्णन कर उक्त गोष्ठी उन्हें समर्पित की, जो जनवरी 2007 में स्वर्गवासी हो गए थे।
चेतन जी ने सर्वप्रथम ‘हमें भारतीय होने का गर्व होना चाहिए’ का संदेश दिया और कहा कि पश्चिमी सभ्यता के आवरण में हम अपनी परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं। अपने दर्द को उन्होंने अपने शब्दों में बयाँ कर कहा ”एक जनवरी चकाचौंध ने, विक्रम संवत भुला दिया’। तत्पश्चात नव हस्ताक्षर विनय विनम्र ने अपनी सुमधुर कविताओं से श्रोताओं को आनन्दित किया। आज की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होनें कहा ‘शासन के खेल निराले हैं, शकुनि ने पासे डाले हैं।’ साथ ही भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए वे बोले ‘कोई खेल-खेल में खाता, कोई भवन बना के खाता; फैला भारी भ्रष्टाचार, देश बचाओ मेरे यार।’ नववर्ष की शुभकामनाओं हेतु उन्होंने गुनगुनाया-
शुभकामना के दो पल, ख़ुशियों के गीत गाऊँ,
स्वागत में आज भर कर, मैं पुष्प थाल लाऊँ
इसके बाद गजेन्द्र सोलंकी ने अपनी रचनाओं से सभी को प्रमुदित किया। पड़ोसी राष्ट्र की दानवी भूख पर उन्होंने राष्ट्रवासियों को सम्बोधित करते हुए जागृत होने का आह्वान इन शब्दों में किया -
‘भारत को ललकार रहा है, फिर ड्रैगन शैतान।
जगे नहीं तो खो जायेगी, भारत की पहचान।।
बचा लो अपना हिन्दुस्तान
बचा लो अपना हिन्दुस्तान।’
तालियों की तुमुल ध्वनि के साथ सभा में उपस्थित श्रोताओं ने खड़े होकर उनका अभिनन्दन किया। कविता की धारा बहती रही और श्रोता आनन्दित होते रहे। गजेन्द्र ने भी पश्चिमी सभ्यता पर प्रहार किए और कहा कि हमारी श्रेष्ठ परम्पराओं में जीवन व्यतीत करें। आप स्वयम् आनन्दित होंगे औरों को भी प्रमुदित करेंगे, यही जीवन है। नदियों में प्रदूषण बन्द करने का आह्वान भी उन्होंने किया। साथ ही भारतीय परिवेश में जीवन व्यतीत करने का आग्रह भी।
इस मासिक कवि गोश्ठी की परिकल्पना को परम्परा का रुप लेना है अत: प्रतिमाह श्रोता प्रथम रविवार को आईपैक्स भवन पर पधारें, यह कहना था आयोजन समिति के चेयरमैन श्री बलदेव गुप्ता का। संयोजक श्री सुशील गोयल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। श्रोताओं ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार के आयोजन करने की चाह लिए विदा हुए।
आईपैक्स भवन वेलफेयर सोसाइटी व आईपैक्स सोसाइटीज महासंघ क्षेत्र में बौध्दिक विकास हेतु सतत् प्रयासशील हैं। प्रधान श्री सुरेश बिन्दल ने पुन: सभी का आभार प्रकट किया और कहा कि युवाओं में कविता व साहित्य के प्रति प्रेम व अभिरुचि उत्पन्न करने हेतु किए गए इस प्रयास की सफलता पर सभी के आभारी हैं। आगन्तुकों को धन्यवाद व अगले माह मिलने की अभिलाषा प्रकट करते हुए गोष्ठी का समापन किया।
मित्रो!
पिछले 15 दिन काव्यांचल पर नई कविताओं का प्रकाशन नहीं हो सका! इसके लिए हमें खेद है। लेकिन यह समय हमने नष्ट नही किया। इस समय में हमने काव्यांचल पर अंग्रेजी खण्ड तथा पुस्तक विक्रय केंद्र की स्थापना की है। इसी दौरान हमने काव्यांचल का एक तिथिपत्र 2011 भी प्रकाशित किया है, जिसमें वाचिक परंपरा के कवियों की जन्मतिथियों को समाहित किया गया है।
अब आपको अपना काव्यांचल एकदम नये रंग-रूप में दिखाई देगा।
आपकी भी यदि कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है तो हम उसको काव्यांचल पर विक्रय हेतु प्रदर्शित कर सकते हैं।
इस मंच को और कैसे समृद्ध बनाया जाए इसके लिये आपके सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी!
-चिराग़ जैन
काव्यांचल परिवार आपको आमंत्रित करता है भव्य लोकार्पण समारोह में।
वरिष्ठ ग़ज़लकार श्री मंगल नसीम जी के सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह “तीतरपंखी” के लोकार्पण के साथ-साथ काव्यंचल कैलेण्डर का भी लोकार्पण होगा।
समय : 5:00 साय
18 दिसम्बर 2010
हिन्दी भवन, विष्णु दिगम्बर मार्ग, नई दिल्ली
स्नेह निमन्त्रण
16 नवम्बर 2010
5:30 PM
टैक्निया सभागार
मधुबन चौंक, रोहिणी
निकट मेट्रो पिलर- 378
दिल्ली- 110085
श्रवण राही स्मृति न्यास वर्ष 2011 के श्रवण राही काव्य पुरस्कार के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित करता है। अंतिम तिथि तक प्राप्त पूर्ण प्रविष्टियों में से निर्णायक मंडल द्वारा चयनित सर्वश्रेष्ठ रचना को वर्ष 2011 का श्रवण राही काव्य पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। पुरस्कृत रचना के रचयिता को पुरस्कार स्वरूप 5100 रुपए की राशि प्रदान की जाएगी।
1. प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अधिकतम आयु 35 वर्ष है।
2. रचनाएँ काग़ज़ के एक ओर साफ़-साफ़ लिखाई में लिखी हुईं अथवा छपी हुई होनी चाहिएँ।
3. प्रतियोगिता में हिन्दी भाषा की किसी भी बोली अथवा शैली में मूल रूप से रचित रचना ही सम्मिलित की जा सकती है।
4. किसी अन्य भाषा से अनूदित रचना को प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जाएगा।
5. एक कवि की अधिकतम तीन रचनाएँ प्रतियोगिता में शामिल की जा सकती हैं।
6. रचनाओं के साथ मौलिकता प्रमाण-पत्र तथा रचनाकार का संक्षिप्त परिचय संलग्न करना आवश्यक है।
7. रचनाएँ दिनाँक 30 नवम्बर 2010 तक डाक, कोरियर, ई-मेल अथवा व्यक्तिगत रूप से निम्न पते पर पहुँच जानी चाहिएँ।
8. डाक में खोई हुई प्रविष्टियों के लिए न्यास उत्तरदायी नहीं होगा।
9. अंतिम तिथि के बाद प्राप्त प्रविष्टियों को प्रतियोगिता में सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
10. पुरस्कार की घोषणा जनवरी 2011 में की जाएगी।
11. निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम तथा सर्वमान्य होगा।
प्रविष्टियाँ भेजने का पता
चिराग़ जैन
एच-24, पॉकेट-ए, आई.एन.ए.कॉलोनी
नई दिल्ली- 110023 (भारत)
+91 9868573612
chiragblog@gmail.com
राजगोपाल सिंह
अध्यक्ष
+91 9810831831
नई दिल्ली। विकलांगों के कल्याण के लिए दिल्ली सरकार कई योजनाओं से लाभान्वित कर रही है। विकलांग समाज के लिए हर प्रकार से संसाधन मुहैया करा रही है। समाज कल्याण, श्रम एवं उघोगमंत्री मंगतराम सिंघल दिनकर सोसाइटी एवं भारतीय नेत्रहीन कल्याण परिषद् के संयुक्त तत्वावधान द्वारा आयोजित टेक्निया इंस्टीट्यूट सभागार,सेक्टर- 14 रोहिणी में 102वीं राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर ‘ जयन्ती समारोह के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। टेक्निया संस्थान के चेयरमैन, समाज सेवी रामकैलाष गुप्ता ने कहा कि विकलांग समाज से ले ही नहीं, बल्कि समाज को दे भी; इसके लिएं हमारा संस्थान समय-समय पर शिविर आयोजित करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि विकलांग का माइने शारीरिक विकलांगता ही नहीं है, वह कई प्रकार की होती है।
सर्वोच्च न्यायालय के वक़ील शिव सागर तिवारी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि दिनकर के साथ ही राष्ट्रकवि की परम्परा समाप्त कर दी गई। अधिवक्ता राम नगीना सिंह ने भी राष्ट्रभाषा के प्रयोग पर ज़ोर दिया। समारोह के मुख्य अतिथि एवं संरक्षक मेजर बलबीर सिंह भसीन ने दिनकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला । विश्वेश्वर शर्मा , आर. एस. ठाकुर आदि वक्ताओं ने दिनकर की प्रासंगिकता पर विचार रखे। नागालैंड ओपन विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर आर.पी। त्रिवेदी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि रोज़गार सृजक पैदा करें, न कि रोज़गार याचक। उन्होंने अशान्ति, बेरोज़गारी, प्रदूषणयुक्त समाज, दोषपूर्ण शिक्षा नीति और जनसंख्या वृध्दि के समाधान पर ज़ोर देकर कहा कि अब यह ख़त्म हो जाना चाहिए। रोहिणी जिला कमेटी कांग्रेस के महासचिव महेश माथुर, कृष्ण मुरारी, डॉ.दीपक, ड़ॉ. संजय शर्मा, इन्द्रजीत झा, सभी ने समाजसेवी , मंत्री मंगतराम, मितल और आगन्तुक सज्जनों का स्वागत किया। प्रथम सत्र् का मंच का संचालन सत्येन्द्र ‘सत्यर्थी’ ने किया।
द्वितीय सत्र् में दिनकर जयन्ती पर नेत्रहीन कल्याण परिषद् द्वारा कवि सम्मेलन मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और सरस्वती गायन से प्रारंभ हुआ। परिषद् के अध्यक्ष रमेश प्रसाद सिंह एवं संस्था के सदस्यगणों द्वारा आगन्तुक कवियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर रमेश प्रसाद ने दिनकर सोसायटी और परिषद् के संयुक्त कार्य पर भ्रम को दूर करते हुए, दोनो के कार्यों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला।
युवा कवि शैलेन्द्र शैल, मेजर बलबीर सिंह भसीन, अनुराग पाठक, सत्येन्द्र सत्यार्थी, शिवशंकर उपाध्याय, कवयित्री राजरानी भल्ला, अनिल गोयल और ईश्वर भारद्वाज ने कविता पाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन विनय विनम्र ने किया।
ग़ौरतलब है कि उक्त कवि सम्मेलन में नेत्रहीन कवियों को ख़ूब सराहा गया। स्मरण रहे कि वैसाखी के पर्व पर शहीदों के श्रध्दांजलि दिवस पर अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद् दिल्ली प्रदेश द्वारा इसी सभागार में पहली बार नेत्रहीन कवियों ने समां बान्ध दिया था।
नई दिल्ली। हिन्दी भवन में साहित्य तथा अध्यात्म के संगम की सुबह थी। अवसर था, तेरापंथ जैन समाज के नौवें आचार्य महाप्रज्ञ जी के तैलचित्र के अनावरण का!
उल्लेखनीय है कि हिन्दी भवन की दीवारों पर हिन्दी के उन साहित्यकारों के चित्र सुसज्जित हैं जिन्होंने अपने जीवनकाल में हिन्दी की महती सेवा की है। इसी क्रम में आचार्य महाप्रज्ञ के चित्र का अनावरण उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महामहिम बी.एल.जोशी ने किया।
इस अवसर पर तेरापंथ जैन समाज के वर्तमान अधिष्ठाता आचार्य महाश्रमण जी का संदेश मुनि अभिजीत कुमार ने पढ़ा। मुनि श्री प्रो. महेन्द्रकुमार के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल श्री टी.एन.चतुर्वेदी ने की। साहित्य अकादमी के सदस्य डॉ. योगेन्द्रनाथ शर्मा ‘अरुण’ ने इस अवसर पर महाप्रज्ञ जी के प्रति एक श्रध्दा गीत समर्पित किया- ‘तुम जीवन का उजियार बने, जैनत्व का दृढ़ आधार बने’।
सुप्रसिध्द संगीतकार व गायक श्री जितेन्द्र सिंह ने आचार्य महाप्रज्ञ के गीतों की संगीतमयी प्रस्तुति से कार्यक्रम को सुरमयी किया।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ.वेदप्रताप वैदिक ने आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि- ‘वे अद्भुत साधु थे और साथ में महान पंडित भी थे। हिन्दी साहित्य में पिछले सौ-सवा सौ वर्ष में इतने जनोपयोगी ग्रंथ अन्यत्र नहीं मिलते जितने आचार्य महाप्रज्ञ ने रचे।’ उन्होंने डॉ. गोविन्द व्यास को साधुवाद देते हुए कहा कि ‘आज का ये समारोह जैन समाज के लिए ही नहीं अपितु समस्त हिन्दी समाज के लिए अविस्मरणीय है।’
महामहिम श्री बी.एल.जोशी ने इस अवसर पर कहा कि, ‘महाप्रज्ञ जी के पास बैठकर यह महसूस होता था कि वे विचारधारा पर चलने वाले महापुरुष मात्र न होकर विचारधारा के सृजनकर्ता थे।’ उन्होंने कहा कि, ‘आचार्य महाप्रज्ञ मुखौटे पहन कर जीने वाले व्यक्ति नहीं थे। वे जैसे थे, वैसे दिखते थे।’
मुनिश्री प्रो. महेन्द्र जी ने इस अवसर पर आशीर्वचन स्वरूप कहा कि ‘जो व्यक्ति अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है वह कभी मर नहीं सकता। ऐसे ही व्यक्तित्व थे आचार्य महाप्रज्ञ। वे केवल जैन समाज के महापुरुष नहीं थे, बल्कि समस्त मानव जाति के आचार्य थे। वे एक ऐसे आत्मवेत्ता थे जिन्होंने ध्यान के माध्यम से चेतना की गहराइयों में डुबकी लगाई। उनका ज्ञान मात्र शास्त्रीय और पुस्तकीय नहीं था।’
श्री टी.एन.चतुर्वेदी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि, ‘महाप्रज्ञ जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने विज्ञान और धर्म के मध्य सेतु निर्माण का महान कार्य किया।’ उन्होंने कहा कि ‘अहिंसा के वे सबसे बड़े व्याख्याता रहे। संस्कृत तथा हिन्दी दोनों ही भाषाओं के तो वे विद्वान थे ही साथ ही साथ प्राकृत के भी वे प्रकाण्ड पण्डित थे। वे केवल धार्मिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि आचार तथा व्यवहार के सामंजस्य के उदाहरण थे।’
कार्यक्रम का संयोजन श्री राजेश भण्डारी और श्री राजेश ‘चेतन’ ने किया। श्रीमती सुनीता जैन ने समारोह का गरिमामयी संचालन कुशलतापूर्वक किया।
आगामी 22 अगस्त की सुबह हिंदी साहित्य जगत् और संत समाज के लिए विशेष होगी। इस दिन तेरापंथ जैन समाज के दशमाचार्य महाप्रज्ञ जी का तैलचित्र हिंदी के साहित्यकारों के चित्र के साथ लगाया जायेगा। उल्लेखनीय है कि आचार्य महाप्रज्ञ ने 300 से अधिक ग्रंथों की रचना की है। उन्होंने कविता, लघुकथा, संस्मरण, शोध, निबंध, आत्मकथा, महाकाव्य आदि तमाम साहित्यिक विधाओं में रचनाएँ की हैं।
तैलचित्र अनावरण समारोह में उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री बी एल जोशी, कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल श्री टी एन चतुर्वेदी तथा वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक आदि व्यक्तित्व उपस्थित रहेंगे। अनावरण कार्यक्रम प्रातः 10:30 बजे से प्रारंभ होगा।
निमण्त्रण पत्र संलग्न है।