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डॉ.बृजेन्द्र अवस्थी की याद में काव्य गोष्ठी

on January 3, 2011

भारत को ललकार रहा है, फिर ड्रैगन शैतान।
जगे नहीं तो खो जायेगी, भारत की पहचान।।

आईपैक्स भवन के सभागार में कवि गजेन्द्र सोलंकी की इस हुंकार पर देर तक तालियाँ गूंजती रहीं। अवसर था नववर्ष 2011 के जनवरी माह के प्रथम रविवार को आयोजित मासिक कवि गोष्ठी का। इन्द्रप्रस्थ एक्सटेंशन दिल्ली-92 की सर्वाधिक चर्चित संस्था, ‘आईपैक्स भवन वेलफेयर सोसाइटी’ ने वीर रस की इस काव्य गोष्ठी में कवि गजेन्द्र सोलंकी, नव हस्ताक्षर विनय विनम्र तथा मंच संचालक राजेश जैन ‘चेतन’ को आमंत्रित किया था। यह गोष्ठी सोसाइटी के साहित्य विभाग द्वारा आरम्भ की गई नई योजना का प्रथम चरण था।
इस योजना के अनुसार वर्ष 2011 के प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को काव्य गोष्ठियों में किसी एक रस के प्रमुख कवि के साथ एक नवोदित कवि के सस्वर पाठ द्वारा स्थानीय निवासियों व श्रोताओं में साहित्यिक अभिरुचि की अभिवृध्दि करा कर इस कम्प्यूटर / मोबाइल युग में कुछ ज़िन्दादिली बनाई रखी जाने की चेष्टा को साकार करना है।
कवियों ने कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप-प्रज्ज्वलित करके किया। वीणापाणि की उपासना कर एक मधुर गीत श्री विनय विनम्र ने सुनाया और उसके साथ ही आरम्भ हो गया राजेश चेतन के संचालन में कवि गोष्ठी का मुख्य कार्यक्रम। इसके पूर्व सोसाइटी के प्रधान सुरेश बिन्दल ने आगन्तुकों का स्वागत-सत्कार भारतीय परम्परा के अनुसार किया और महासचिव आर सी जैन ने कविश्रेष्ठ डॉ. बृजेन्द्र अवस्थी का परिचय व उनकी काव्यधारा का वर्णन कर उक्त गोष्ठी उन्हें समर्पित की, जो जनवरी 2007 में स्वर्गवासी हो गए थे।
चेतन जी ने सर्वप्रथम ‘हमें भारतीय होने का गर्व होना चाहिए’ का संदेश दिया और कहा कि पश्चिमी सभ्यता के आवरण में हम अपनी परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं। अपने दर्द को उन्होंने अपने शब्दों में बयाँ कर कहा ”एक जनवरी चकाचौंध ने, विक्रम संवत भुला दिया’। तत्पश्चात नव हस्ताक्षर विनय विनम्र ने अपनी सुमधुर कविताओं से श्रोताओं को आनन्दित किया। आज की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होनें कहा ‘शासन के खेल निराले हैं, शकुनि ने पासे डाले हैं।’ साथ ही भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए वे बोले ‘कोई खेल-खेल में खाता, कोई भवन बना के खाता; फैला भारी भ्रष्टाचार, देश बचाओ मेरे यार।’ नववर्ष की शुभकामनाओं हेतु उन्होंने गुनगुनाया-
शुभकामना के दो पल, ख़ुशियों के गीत गाऊँ,
स्वागत में आज भर कर, मैं पुष्प थाल लाऊँ

इसके बाद गजेन्द्र सोलंकी ने अपनी रचनाओं से सभी को प्रमुदित किया। पड़ोसी राष्ट्र की दानवी भूख पर उन्होंने राष्ट्रवासियों को सम्बोधित करते हुए जागृत होने का आह्वान इन शब्दों में किया –
‘भारत को ललकार रहा है, फिर ड्रैगन शैतान।
जगे नहीं तो खो जायेगी, भारत की पहचान।।
बचा लो अपना हिन्दुस्तान
बचा लो अपना हिन्दुस्तान।’

तालियों की तुमुल ध्वनि के साथ सभा में उपस्थित श्रोताओं ने खड़े होकर उनका अभिनन्दन किया। कविता की धारा बहती रही और श्रोता आनन्दित होते रहे। गजेन्द्र ने भी पश्चिमी सभ्यता पर प्रहार किए और कहा कि हमारी श्रेष्ठ परम्पराओं में जीवन व्यतीत करें। आप स्वयम् आनन्दित होंगे औरों को भी प्रमुदित करेंगे, यही जीवन है। नदियों में प्रदूषण बन्द करने का आह्वान भी उन्होंने किया। साथ ही भारतीय परिवेश में जीवन व्यतीत करने का आग्रह भी।
इस मासिक कवि गोश्ठी की परिकल्पना को परम्परा का रुप लेना है अत: प्रतिमाह श्रोता प्रथम रविवार को आईपैक्स भवन पर पधारें, यह कहना था आयोजन समिति के चेयरमैन श्री बलदेव गुप्ता का। संयोजक श्री सुशील गोयल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। श्रोताओं ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार के आयोजन करने की चाह लिए विदा हुए।
आईपैक्स भवन वेलफेयर सोसाइटी व आईपैक्स सोसाइटीज महासंघ क्षेत्र में बौध्दिक विकास हेतु सतत् प्रयासशील हैं। प्रधान श्री सुरेश बिन्दल ने पुन: सभी का आभार प्रकट किया और कहा कि युवाओं में कविता व साहित्य के प्रति प्रेम व अभिरुचि उत्पन्न करने हेतु किए गए इस प्रयास की सफलता पर सभी के आभारी हैं। आगन्तुकों को धन्यवाद व अगले माह मिलने की अभिलाषा प्रकट करते हुए गोष्ठी का समापन किया।


One Response to “डॉ.बृजेन्द्र अवस्थी की याद में काव्य गोष्ठी”

  1. nirmla.kapila says:

    एक सार्थक प्रयास।अयोजन कर्ताओं व प्रतिभागियों को बहुत बहुत बधाई।

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