गुरु ने चेले से कहा लेटे-लेटे-
कि उठ के पता लगाओ
बरसात हो रही है या नहीं बेटे
तो चेले ने कहा-
ये बिल्ली अभी-अभी बहार से आई है
इसके ऊपर हाथ फेर कर देख लीजिये
अगर भीगी हुई हो तो
बरसात हो रही है समझ लीजिये।

गुरु ने दूसरा काम कहा
कि सोने का समय हुआ
ज़रा दीया तो बुझा दे बचुआ
बचुआ बोला-
आप आंखें बंद कर लीजिये
दीया बुझ गया समझ लीजिये।

अंत में गुरु ने कहा हारकर
कि उठ किवाड़ तो बंद कर
तो शिष्य ने कहा कि गुरुवर
थोड़ा तो न्याय कीजिये
दो काम मैंने किये हैं
एक काम तो आप भी कर दीजिये।

© आश करण अटल