‘लाश-घर’ है इतिहास
एक एल्बम है जिसमें
सजे हैं धुंधले चित्र
महलों के
षड्यंत्रों के
युद्ध के मैदानों के…

कहाँ है प्राणवन्ता?
रंग… रूप… रस…
कहाँ हैं धड़कनें?
आहें?
वह तो भला हो कल्पना का!

© जगदीश सविता