तेरा खिल के मुस्कुराना
मेरा खिंचा चला आना
साथ-साथ चलता है

तेरा नज़रें मिलाना
मेरी आँखों में बस जाना
साथ-साथ चलता है

कभी झलक भी न पाना
मेरा तरस-तरस जाना
साथ-साथ चलता है

फ़ुर्सत में भी जब तन्हा हो
तेरे पास आ न पाना
साथ-साथ चलता है

कुछ मन में सोच लेना
पर तुझसे कह न पाना
साथ-साथ चलता है

कैसे कहूँ, यही उलझन
उलझन में लौट जाना
साथ-साथ चलता है

तेरी याद का सताना
मेरी आँखें भर आना
साथ-साथ चलता है

अजय सहगल