जे हाल मिसकी मकुन तगाफ़ुल, दुराय नैना बनाय बतियाँ
कि ताबे हिज़्राँ न दारम ऎ जां! न लेहु काहे लगाय छतियाँ

शबाने हिज़्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़, व रोज़े वसलत चूँ उम्र कोलह
सखी! पिया को जो मैं न देखूँ, तो कैसे काटूँ अंधेरी रतियाँ

यकायक अज़ दिल, दो चश्म-ए-जादू, ब सद फ़रेबम बाबुर्द तस्कीं
किसे पड़ी है जो जा सुनावे, पियारे पी को हमारी बतियाँ

चो शमा सोज़ान, चो ज़र्रा हैरान, हमेशा गिरयान, बे इश्क आं मेह
न नींद नैना, ना अंग चैना, ना आप आवें, न भेजें पतियाँ

बहक्क-ए-रोज़े, विसाल-ए-दिलबर, कि दाद मारा, ग़रीब ‘खुसरौ’
सपेट मन के, वराये राखूँ, जो जाये पाँव, पिया के खटियाँ

© अमीर ख़ुसरो