एक खुली खिड़की-सी लड़की
देखी मस्त नदी-सी लड़की

ख़ुशबू की चूनर ओढ़े थी
फूल बदन तितली-सी लड़की

मैं बच्चे-सा खोया उसमें
वो थी चांदपरी-सी लड़की

जितना बाँचूँ उतना कम है
थी ऐसी चिट्ठी-सी लड़की

काश कभी फिर से मिल जाए
वो खोई-खोई-सी लड़की

© नरेश शांडिल्य