महफ़िल में मेरा ज़िक्र मेरे बाद हो न हो
दुनिया को मेरा नाम तलक याद हो न हो

है वक़्त मेहरबान जो करना है कर अभी
मालूम किसे कल यूँ ख़ुदा शाद हो न हो

दिल दर्द से आबाद है कह लूँ ग़ज़ल अभी
इस दिल का क्या पता कि फिर आबाद हो न हो

इज़हार मुहब्बत का किया सोच कर यही
कल किसको ख़बर फिर से यूँ इरशाद हो न हो

उल्फ़त के मेरी आज तो चर्चे हैं हर तरफ़
कल वक़्त के होंठों पे ये रूदाद हो न हो

© नरेश शांडिल्य