मोरपखा मुरली बनमाल, लख्यौ हिय मै हियरा उमह्यो री
ता दिन तें इन बैरिन कों कहि कौन न बोल-कुबोल सह्यो री
अब रसखान सनेह लग्यौ कौउ एक कह्यो कोउ लाख कह्यो री
और सो रंग रह्यो न रह्यो इक रंग-रंगीले सो रंग रह्यो री

रसख़ान