मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं, गुंज की माल गले पहिरौंगी
ओढ़ि पितम्बर लै लकुटी, बन गोधन ग्वालन संग फिरौंगी
भावतो सोई मेरो रसखान सो तोरे कहे सब स्वांग करौंगी
या मुरली मुरलीधर की, अधरान धरी अधरा न धरौंगी

रसख़ान