हर बार
मुझे समझदार बताकर
समझा देते थे तुम
और
बहल जाती थी मैं….

अब समझ आता है
कि समझदारी का
सबसे बड़ा गुण र्है
नासमझ बन जाना
कभी भी!

© संध्या गर्ग