रचनाएँ

Smartphone Lovestory


मरती हू मैं हर दिन


हे मेरे चितवन के चकोर


अंतस की प्यास


रात की रागिनी


और कुछ देर मुझे पास बिठाये रखिये


जाने कब से तरस रहे हैं


आजकल बज़्म में आते हुए डर लगता है


मेरे बढ़ने से जल गये हो तुम


यक्ष प्रश्न


2012


शर्मिंदा राष्ट्र की ओर से प्रतिक्रिया


शरद पूर्णिमा


वो आँखें


बारिश


इस अंतर में प्रभु रहते हैं


चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी


एक स्वर मेरा मिला लो!


हिमालय


नदी तुम स्त्री