रचनाएँ

Category: कुलदीप आज़ाद

छल रही ज़िन्दगी


विवाह-निमंत्रण


भ्रम


आदमी बदलते देखा है


विद्या है अनमोल रतन


उलझन में हूँ


ये फ़क़त अफ़वाह है


तुम मुझे मुझसे ज़्यादा जानती हो……………!


मैंने ज़िन्दगी देखी है


प्यार दे कोई


गुज़रा हुआ कल लिखता हूँ


बावरे ये लोग


मांगता कैसे


नज़रिया


बचपन


क्या नाम दूँ?