रचनाएँ

Category: उदय प्रताप सिंह

आँखें भर आईं


देखे रोज़ फिसलते लोग


भगवान सबका है


माली तुम्हीं फैसला कर दो


ग़लत कहानी नहीं चलेगी


प्यार तुम्हें दे सकता हूँ