रचनाएँ

Category: धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’

जो लोग शहीदों की तरह मरते हैं


इन्सान ही रहना सीखो


ख्वाबों को बनाना होगा


मंदिर में ही भगवान


पानी में भी आग लगाना सीखो


हर साँस को विश्वास बना


दर्द को सद्भाग्य समझ जीता है


अनजान की पहचान


सत्य सनातन है कज़ा आएगी


समदर्शी ही होता दर्पण


जीवन का मंथन


दुर्भाव सभी मन से निकल जाएंगे


कब कौन कहाँ किसको भलाई देता


निज धर्म पे भाषा पे कोई लड़ता है


लगता कि अबल जीवन है


मानव न अभी तक चेता


दर्द सज़ा देता है


तू अग्नि, सलिल और अनिल भी चंचल