रचनाएँ

Category: नीलांबुज सिंह

‘अकबर’-सी धुन लाएँ कहाँ


उंगलियाँ बन गईं ज़ुबां अब तो


ख़ूब दिलकश हैं ये अन्दाज़ बहुत


अब वो ख़ुश है!


वो चंद आँसू


ममता का भी दाम लगाया


कोई हमसफ़र भी नहीं


दुविधा


आँसू से बुझाया न करो


लिखा तो हमने भी


ख़त मुहब्बत के