रचनाएँ

Category: कुमार विश्वास

बाँसुरी चली आओ


सफ़ाई मत देना


मैं तुम्हें ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक


पगली लड़की


उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती


फिर बसंत आना है


मैं तो झोंका हूँ


जाने कौन नगर ठहरेंगे