रचनाएँ

Category: कृष्ण बिहारी ‘नूर’

इंतज़ार किया


रख-रखाव ऐसा था


चलिए चलकर गाँव में देखें


ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं


बिछड़ के तुझसे