रचनाएँ

Category: कलीम क़ैसर

दर्द ये सोचकर कमाया है


अच्छा नहीं लगता


ख़ून को पानी बना लिया


हमें विश्वास है व्यभिचारी शासन हार जाएगा


ख़ुद से भी हाथ धो चुका हूँ मैं