रचनाएँ

Category: भगवत रावत

जब कहीं चोट लगती है


वह कुछ हो जाना चाहता है


लौटना


थोड़ा-सा आसमान


हमने उनके घर देखे


करुणा


चट्टानें


थक चुकी है वह


चिड़ियों को पता नहीं


बच्चा