रचनाएँ

Category: श्रद्धा जैन

बदली नज़र नहीं आती


किसने जाना कि कल है क्या होगा


वक़्त करता कुछ दग़ा


मिज़ाज फूलों का


मिरे ग़म बढ़ा दीजिए


फानूस की न आस हो


अच्छी है यही ख़ुद्दारी


मुश्क़िलें आईं अगर


तेरे बगैर


इशारों से कहेंगे