रचनाएँ

Category: आनन्द बख्शी

चांद-सी महबूबा हो मेरी


ये जीवन है


ये रातें नई-पुरानी


दिए जलते हैं


डोली में बिठाइके कहार


कुछ तो लोग कहेंगे


पिया तूने क्या किया


सावन का महीना पवन करे सोर


मेरे हमसफ़र


प्यार दीवाना होता है


ये शाम मस्तानी