रचनाएँ

Category: मनु बेतख़ल्लुस

पिघल रहा है कोई


कहर बरपाता है दिल


जब भी वाबस्ता हुआ


पीने के बाद


अपना दिल सम्भाला है


क़लाम में ख़ुशबू


ज़रा अदब से चल


क्या हसीं ज़माने हैं


आदमी मिले


नज़र नहीं आती


यूँ नुमाईश हो गई


हज़ारों बोझ हैं रूह पर