रचनाएँ

Category: अनिल वर्मा ‘मीत’

मेरी बानी ख़ुद बोलेगी


हादसा गर हुआ नहीं होता


दिल में ख़ुशी भर जाएगा


फिर उसने आज मुझको हैरान कर दिया है


मुहब्बत में अब रंग आने लगा है


दिल मेरा तेरी रहगुज़र में नहीं


ज़माना देखता रह जाएगा


रुकना इसकी रीत नहीं है


फ़ासला कम अगर नहीं होता


जिसकी जितनी उड़ान बाक़ी है