रचनाएँ

Category: कुँवर जावेद

ख़तरे में इस्लाम हो नहीं सकता


ख़ुश्बू की खेती


चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती


बम नहीं समझता है


दिए से शहर जलाते हैं


सबसे बड़ा नमूना


बाहर से नहीं आए हैं


पुरखे नहीं बदल जाते


हम भी इसके हैं