रचनाएँ

Category: हरीश अरोड़ा

तुम्हारे प्यार के बिन


बेटियाँ


जो आग नहीं बन सकते


मेरे घर की मुफ़लिसी ने


ख़ुद को ग़म से छुड़ा लो ज़रा


लड़की


प्रेम


अस्पर्श स्पर्श


अपरिचित


ऐ दोस्त! तुम भोले ही रहो


चिड़िया सच-सच बताना!