रचनाएँ

Category: गीत

हे मेरे चितवन के चकोर


अंतस की प्यास


रात की रागिनी


एक स्वर मेरा मिला लो!


तुम निश्चिन्त रहना


हिलता रहा मन


ग़ुलाब हमारे पास नहीं


वसन्त


आया वसंत आया वसंत


वीरों का कैसा हो बसंत


आए महंत वसंत


नदिया के किनारे


मन आज़ाद नहीं है


मेरा नाम लिया जाएगा


तस्वीर अधूरी रहनी थी


एक पल के लिये मन द्रवित तो हुआ


‘नीरज’ गा रहा है


मेरे मन-मिरगा नहीं मचल


जो आग नहीं बन सकते


दिये से मिटेगा न मन का अंधेरा