रचनाएँ

Category: अखलाक़ मौहम्मद ख़ान ‘शहरयार’

ये क्या जगह है दोस्तो, ये कौन-सा दयार है


सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान-सा क्यूँ है


हद्द-ए-निगाह तक ये ज़मीं है सियाह फिर