रचनाएँ

Category: उर्मिलेश शंखधर

और कुछ देर मुझे पास बिठाये रखिये


जाने कब से तरस रहे हैं


आजकल बज़्म में आते हुए डर लगता है


मेरे बढ़ने से जल गये हो तुम