रचनाएँ

Category: मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ाँ ग़ालिब

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है


नक्श फ़रियादी है, किसकी शोख़ी-ए-तहरीर का


अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा


जुज़ क़ैस और कोई न आया बरू-ए-कार


जो तिरी बज्म से निकला सो परीशां निकला


कहते हो न देंगे हम, दिल अगर पड़ा पाया


दिल में, ज़ौक़े वस्ल यादे यार तक बाक़ी नहीं