रचनाएँ

Category: गोपाल सिंह ‘नेपाली’

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है


दीपक जलता रहा रात भर


स्वाधीन क़लम


सरिता का बहता जल


मुस्कुराती रही कामना


घर तो रखवालों ने लूटा


इतना सस्ता मैं हो न सका


यह दिया बुझे नहीं