इक आम-सी लड़की थी

इक आम-सी लड़की थी

रमेश शर्मा

जब गरजे तब बरसे नहीं -उस शाम-सी लड़की थी
उहापोह के निकले हुए परिणाम-सी लड़की थी
गीत मैं जिसके गाता हूँ इक आम-सी लड़की थी

परी न चंदा, मृगनयनी, ना रूप की राजकुमारी-सी
कलकल नदिया, ना ही अप्सरा, ना सुंदर फुलवारी-सी
कलाकार की कल्पित रचना, मैना ना अमराई की
मस्त ठुमकते सावन जैसी, ना चंचल पुरवाई-सी
लीपे आंगन पर मांडे चितराम-सी लड़की थी

दो के पहाड़े जैसी सीधी, एक से दस तक गिनती-सी
पहली कक्षा के बच्चे की विद्या माँ से विनती-सी
चूल्हा, चौका, झाड़ू, बर्तन, बचपन से ही बोझ लिए
चित्रकथा की पुस्तक थी वो माँ के हाथों छिनती-सी
आधे वाक्य के आगे पूर्णविराम-सी लड़की थी

मोहल्ले की हलचल पर वो करती नहीं थी परिचर्चा
मोर-सा नर्तन, भँवरे गुनगुन, तितली-सी ना दिनचर्या
रजनीगंधा, जूही, केतकी, अनुकंपा, ना जिज्ञासा
श्वेता, मुक्ता, युक्ता, ना ही क्षमा, विभा, ऐश्वर्या
सीता, गीता, मीरा जैसे नाम-सी लड़की थी

गंधों का ना मादकता, उत्तेजक अहसास जगे
भाव-भंगिमा नहीं कि ऐसी कंठ सुखाती प्यास जगे
ताजमहल पर रुके चांद का चित्र न दीखा उसमें तो
मैं क्या बोलूँ देख के उसको मुझमें क्या आभास जगे
तेज़ बुख़ार के बाद हुए आराम-सी लड़की थी

5 Responses to “इक आम-सी लड़की थी”

  1. 1
    Shahid "ajnabi" Says:

    aadarniye,
    ek lambe arshe ke baad itna khubsurat geet nazron se guzra.

    shahid “ajnabi’

  2. 2
    sanjay jain Says:

    another rachna “sab kab se badal gaya maa”.

  3. 3
    भरत शर्मा Says:

    आदरणीय शर्मा जी,

    सर्वप्रथम कोटा दशहरा में आपका काव्य पाठ सुना तब से ही में और मेरा परिवार आपका विशेष प्रशंसक बन गया है, एक लम्बे समय के अंतराल के बाद ऐसा मधुर काव्य सुनने का अवसर मिला, निसंदेह आपकी रचना मन को प्रफुल्लित करने वाली है, इनकी सादगी ही इनकी विशेषता है, आप चिरकाल तक लिखते रहे यही शुभकामना है …

    आपका

    भरत शर्मा
    कोटा राजस्थान मो ९४१३३५२७११

  4. 4
    dr.prashant dev mishra Says:

    Dada apke saath rahe baithe ghoome..kavitaen suni.par mujhe or deval bhai ko aap k geet ..bahut pasand hain.ham akelr me geet gaate hain aapke..apka dev.d

  5. 5
    MUKESH Says:

    अद्भुद

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