ऐसा मन्त्र सिखाओ भन्ते!

ऐसा मन्त्र सिखाओ भन्ते!

कनकप्रभा

ऐसा मन्त्र सिखाओ भन्ते!
अपना चित्त पुनीत बना लूँ
रखता जो दुर्भाव हृदय में
उसको अपना मीत बना लूँ

महापर्व के आराधन का
राज यही तुमसे पाया है
संवत्सर भर का मल धोने
यह अनुपम अवसर आया है
ऐसी कला सिखाओ भन्ते!
आँसू का संगीत बना लूँ

क्षमा, मुक्ति, आर्जव, मार्दव का
तुमने जो पाथेय दिया है
भूलो और भुलाओ उनको
तुमने जो ये ध्येय दिया है
ऐसी शक्ति जगाओ भन्ते!
द्वेष-दाव को प्रीत बना लूँ

महाहिमालय पर्यूषण का
चढ़ें शिखर संकल्प सहारे
आज ध्वजारोहण का मन है
तट तक आकर क्यों मन हारे?
ऐसा पाठ पढ़ाओ भन्ते!
जो कुछ हुआ अतीत बना लूँ

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