गहरी प्यास को जैसे मीठा जल देते तुम बाबूजी

गहरी प्यास को जैसे मीठा जल देते तुम बाबूजी

दिनेश रघुवंशी

गहरी प्यास को जैसे मीठा जल देते तुम बाबूजी
जीवन को सारे प्रश्नों के हल देते तुम बाबूजी

सबके हिस्से शीतल छाया, अपने हिस्से धूप कड़ी
गर होते तो काहे ऐसे पल देते तुम बाबूजी

माँ तो जैसे– तैसे रुखे-सूखे टुकड़े दे पाई
गर होते तो टॉफ़ी, बिस्कुट, फल देते तुम बाबूजी

अपने बच्चों को अच्छा– सा वर्तमान तो देते ही
जीवन भर को एक सुरक्षित कल देते तुम बाबूजी

काश तरक्की देखी होती अपने नन्हे-मुन्नों की
फिर चाहे तो इस दुनिया से चल देते तुम बाबूजी

3 Responses to “गहरी प्यास को जैसे मीठा जल देते तुम बाबूजी”

  1. 1
    गीतिका "वेदिका " Says:

    बहुत सुंदर कविता…. सचमुच पठनीय और आत्मसात करने योग्य!!!

  2. 2
    Amit mishra Says:

    sach me apratim kavita , mata pita ghani chhav dene wale briksha hai

  3. 3
    वीरेंद्र रघुवंशी Says:

    माता जी की वन्दना के बाद आपकी ये पंग्तियाँ पढ़ कर मन में आपका सम्मान और बढ़ गया है जय जय सिया राम ” पिता है तो संसार के हर खिलोने अपने हैं “

Leave a Reply