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चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती

कुँवर जावेद

वो चाहे कितना भी पानी समेट लो यारो
कभी भी गंगा की रौ में कमी नहीं आती
कि इक चिराग़ से जलते कई चिराग़ मग़र
किसी चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती

3 Responses to “चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती”

  1. 1
    भारतीय नागरिक Says:

    भई वाह…

  2. 2
    rana Says:

    Behad umda

  3. 3
    LNPradhan Says:

    wah kuwar sahab bahut sundar

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