एक स्वर मेरा मिला लो!

एक स्वर मेरा मिला लो!

सोहनलाल द्विवेदी

वंदना के इन स्वरों में
एक स्वर मेरा मिला लो!

राग में जब मत्त झूलो
तो कभी माँ को न भूलो
अर्चना के रत्नकण में
एक कण मेरा मिला लो!

जब हृदय का तार बोले
शृंखला के बंद खोले
हों जहाँ बलि शीश अगणित
एक शिर मेरा मिला लो!

वंदना के इन स्वरों में
एक स्वर मेरा मिला लो!

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