रचनाएँ

वो आँखें

सुधीर मौर्या ‘सुधीर’

वो आँखे
नीली झील सी गहरी

वो सांसें
मेरे मन की प्रहरी
वो हँसना
वो इठलाना उनका
वो मेघ दिवस
वो रुत सुनहरी

पायल छनकाते
आना उनका
हाथो का सतरंगी कंगना
मेरी अटारी,
कार्तिक की दुपहरी

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