बचपन

बचपन

कुलदीप आज़ाद

लौटा दो मेरा बचपन
उसके बदले क्या लोगे?
माँ की थपकी माँ का चुबंन
उसके बदले क्या लोगे?
जिसके आँचल की छाया में
मैंने घुटनों चलना सीखा
वो कच्चा-सा टूटा आंगन
उसके बदले क्या लोगे?

सुबह-सुबह जगना रोकर
स्कूल चले बस मुँह धोकर
वही नाश्ता रोज़ सुबह
बासी रोटी, ताज़ा मक्खन
उसके बदले क्या लोगे?

हाथों में तख्ती और खड़िया
बस्ते में स्याही की पुड़िया
पट्टी पर सिमटा-सा बैठा
बूढ़ा भारत नन्हा बचपन
उसके बदले क्या लोगे?

दिन भर रटते फिरना पोथी
गहरी बातें और कुछ थोथी
फिर छह ऋतुओं बाद दिखे
जाता पतझड़ आता सावन
उसके बदलें क्या लोगे?

रस्ते भर करना मस्ती
गूंजे चौराहा, हर बस्ती
लटक पेड़ो से ले भगना
कच्ची अमिया पक्के जामुन
उसके बदले क्या लोगे?

गिट्टे, कंचे, गुल्ली, डंडा
भगना-छिपना लेना पंगा
गुड्डे-गुड़ियों के खेलों में
बिन दहेज ले आना दुल्हन
उसके बदले क्या लोगे?

फिर थके बदन घर की खटिया
इक परीलोक नन्हीं दुनिया
लोरी गाते चंदा-तारे
बुनता सपने बिखरा जीवन
उसके बदले क्या लोगे?

8 Responses to “बचपन”

  1. 1
    neel Says:

    wah.. wah,, aanand aa gaya.. itni bareekee.. itni saralta.. waoooooooo

  2. 2
    shubhra Says:

    सच में बचपन सा ही भोला, मासूम और सरल हैं आपकी कविता। आपकी प्रशंसक पहले से ही थी…….
    आज आपकी कविताओं को पढकर बहुत अच्छा लगा।

  3. 3
    Kuldeep Azad Says:

    नील भैया धन्यवाद ,

    आपका उत्साहवर्धन ही है जो कुछ भी लिखने पर
    और कुछ लिखने की प्रेरणा देता है …!
    साथ रहिये
    यूँ ही
    हमेशा …….!

    वि
    ता से
    कविता तक के सफ़र के साथी है आप हमेशा सहयात्री सफ़र के ….!

  4. 4
    Kuldeep Azad Says:

    शुभ्रा पाजी,
    ये बड़े बड़े शब्द अच्छे नहीं लगते …!
    प्रशंशक क्या होता है ….!
    बस ये प्यार बना रहे
    यूँ ही
    समझी
    मोटी कंही की ………..!

  5. 5
    Mukul Sharma Says:

    wow kya kavita hai, Great work Keep it up…….

  6. 6
    deep Says:

    bhai ami bhi bacpan may laut gaya. jo bhi parhyga o bachpan may jayga aisa mayra dava hai.

  7. 7
    Kuldeep Azad Says:

    Thanks Mukul,

    Kavyanchal main tumhe Aur bhee Bahut kuch milega
    mera bhee
    Aur Bade famous Poets ka

    so watch it Regularly….!

  8. 8
    Kuldeep Azad Says:

    Deep Bhaiya,

    Ess Umr main to nashrudeen shah ko bhee BOlna pada thaa….

    Dil to Bachchha hai Ji

    aap bhee Bol rahen hai to Kya Galat hai

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