रचनाएँ

अनजान की पहचान

धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’

अनजान की पहचान बना देता है
ग़म को भी तो मुस्कान बना देता है
है प्यार का मधुमास ‘सुधाकर’ ऐसा
वीरान को उद्यान बना देता है

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