रचनाएँ

दर्द को सद्भाग्य समझ जीता है

धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’

जो दर्द को सद्भाग्य समझ जीता है
वह घाव को भी दर्द से ही सीता है
शिव का ही उसे रूप ‘सुधाकर’ समझो
विष को भी जो अमृत-सा समझ पीता है

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