रचनाएँ

मंदिर में ही भगवान

धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’

मंदिर में ही भगवान समझने वाले
होते नहीं सद्ज्ञान समझने वाले
भगवान तो रहता है सदा कण-कण में
यह बात समझते हैं समझने वाले

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