रचनाएँ

ख्वाबों को बनाना होगा

धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’

टूटे हुए ख्वाबों को बनाना होगा
ज़ख्मों को ही अब दिल में सजाना होगा
मरहम की न फिर कोई ज़रूरत होगी
ज़ख्मों से ही बस दर्द मिटाना होगा

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