रचनाएँ

इन्सान ही रहना सीखो

धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’

इन्सान हो, इन्सान ही रहना सीखो
हर बात सलीक़े से ही कहना सीखो
रखते हो तमन्ना जो ख़ुशी की तुम भी
जीवन में ग़मों को भी तो सहना सीखो

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